शादी, सुहागरात और हवस की कहानी - 69

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Jan 8, 2017.

  1. 007

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    दो बिचारी का मान, बोल दो ना" मेरी सारी जीतानियो ने एक साथ कहा और फिर वो गाने लगी,

    "सईयाँ के स्म्ग रजैईया में बड़ा मजा आए, छू" और मैं भी साथ दे रही थी. लेकिन जैसे ही मैंने चुदाया बोला सब की सब शांत हो गयी और सिर्फ़ मेरी आवाज़ में चुदाया सुनाई दिया. सब औरतें एक साथ ज़ोर से हंस के बोली की अब ये भी शामिल हो गई हम लोगों की गोल में. और फिर एक जेठानी ने दुलारी से कहा,

    "अरे मान लो ई सरमा रही है, तो तुम तो बड़ी बियाहिता ननद हो तुम ही सुनाई दो इस के रात का हाल."

    "सुनती हूँ. अरे गे के सुनौँगी ज़रा ढोलक तो उठे दो, " और गुड्डी ने उनको ढोलक पकड़ा दी. और उन्होंने गाना शुरू कर दिया,

    भिनसारे चिरिया के बोली अरे भिनसारे चिरैया के बोली,

    अरे हमारे भैया ने भाभी की चोली खोली,

    अरे चोली खोल के चूची टटोली और फिर दुलारी ने गाने गाने में सब कुछ, कैसे 'उन्होंने' मेरी चोली खोल के कस के चूंचिया दबाई, कैसे मेरी कसी चुत में पहले उंगली की फिर टांगे उठा के कैसे खचाखच चोदा, खूब देर तक सुनती रही. जब उसने गाना खत्म किया तो गलती से गुड्डी के मुंह से निकल गया, की तुम तो हमारी बुआ के पीछे ही पड़ गयी. बस क्या दुलारी अब उसके पीछे,

    "अरे बुआ की भतीजी की चुत मरूं, अरे अपनी बुआ के गाल तो देखो जैसे माल पुआ. खूब कचकच काटने लायक है और कटवाती भी है. अरे बुआ बुआ करती हो तुम्हारी बुआ को तुम्हारी कुछ फिक्र ने. जब एक बुआ थी तुम्हारी तो इतने फूफा थे की गिनती नहीं (मेरी जेठानी की ओर इशारा कर के वो बोली) और अब ये आ गयी है. इनका तो हाल तुमने सुन ही लिया की जब से आई है, दिन रात खाली चुदाया रही है, और तुम्हारी वो बुआ वो तो वो भी तुम्हारे फूफा के या क्या पता कही तुम्हारे अंकल ने भी मौका देख के हाथ साफ कर लिया हो. कही बुआ ने सोचा की ये भतीजी भी कब की चौदह पर कर के चुदवाने लायक हो गयी है, इसकी चुचियां गदरने लगी है. आपने तो लंड घोंटने में, ज़रा इसके लिए भी लंड का इंतजाम करे. मैंने तो कल समझाया था ना, शादी बियाः का घर है, इतने लड़के मर्द है पाते लो किसी को. अरे कुछ दिन में तो लौट जाओगी तो किस को क्या पता चलेगा कीबुआ के भरोसे रहोगी तो."

    रजनी ने बात काट के बताया की कल मैंने गुड्डी का मेक आप भी किया था और होंठ पे लिपस्टिक भी.."

    "अरे नीचे वाले होंठ पे भी तो लिपस्टिक पौडर लगाया करो, जो 'खड़ा' (वर्टिकल) होंठ है उसकी भूख का भी तो इंतजाम करो, खाली ऊपर वाले पड़े ( हरिजोटल) होंठ का सिंगर करती हो. ज़रा एक बार आपने खड़े होंठ की झाँकी तो दिखे दो बिंनो" ये कह के दुलारी ने झटके से उसकी फ्रॉक ऊपर उठा दी. और उसकी पूरी जांघें दिख गयी.

    गनीमत था की उसने एक सफेद चड्डी पहन रखी थी. दुलारी का हाथ वहां भी पहुँच गया और उसको चिढ़ते हुए बोली,

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    "अरे इस भूल भूल को ऐसे पिंजरे में बंद किए रहोगी तो चारा वारा कैसे गटकेगी. ज़रा इसको हवा तो खिलाओ" और वो शायद और भी तंग करती, लेकिन चमेली भाभी बीच में आ गयी. उन्होंने दुलारी का हाथ पकड़ के कहा,

    "तुम सबका हाल तो पूछ रही हो, लेकिन गौने के बाद महीने भर हुआ, आए अपना हाल तो सुनाया नहीं की गौने की रात सईयाँ ने क्या क्या किया. कैसे दो महीने चुड़वाया, ज़रा नाच के तो दिखा हिम्मत हो तो." सेर को सवा सेर मिल गया था.

    चमेली भाभी ने उसका हाथ खींच के खड़ा कर लिया, नाचने को. मेरी जेठानी ने ढोलक सम्हली. दुलारी ने गाना शुरू किया लेकिन गाने के पहले बोली, ये गाना नहीं भौजी के हाल का है. और फिर गाना शुरू हो गया,

    गवाने की रात दुख डाई रे अबाहु ना भूले.

    बारह बजे सुन सैया की बोलिया,कौनो ननादिया खिड़कियां ना खोले,

    रात भर पेरैला हरजाई रे, अबाहु ना भूले,

    ( अरे पेरेला की पेलैला, मेरी जेठानी ने छेद के पूछा) रही बेदर्दी चोली मोरा मसके, बाला जोबनवा दबवे दूनो कस के.

    मर गयी हे मोरी मैं रे, गवाने की रात दुख डाई रे अबाहु ना भूले.

    लूट लिहाले हमारे नैहर के मालवा, सिनावा पे चढ़के दबवे दोनों गालवा ( अरे भाभी माल लुटवाने ही तो इतना साज स्मवर के आई थी अब क्या शिकायत, ननंदे मेरे पीछे पड़ गयीं) काट लहले जैसे नं खटाई रे, अबाहु ना भूले गवाने की रात दुख डाई रे अबाहु ना भूले.

    और गाने के साथ साथ पूरा ऐक्शन, दोनों ने एक दूसरे की शादी साया सब उठा लिया, और फिर रगड़ रगड़ के, पॉज़ बदल बदल के पूरा ट्रिपल एक्स ऐकस्न था. वो तो बाहर से मेरी सास ने आवाज़ दी तो वो बंद हुआ और दरवाजा खुला. बाहर महारजिन खड़ी थी की नाश्ता बन गया है. कुछ लोग बाहर गये लेकिन मेरे और जेठानी जी के लिए वही गुड्डी और रजनी ले के आई. हम लोग नाश्ता खत्म ही कर रहे थे की मेरे नंड़ोई अश्वनी,उनकी पत्नी, मझली ननद, और अंजलि आई.

    वो बोले क्या खाया पिया जा रहा है अकेले अकेले. मैंने उन्हें अफार किया तो हंस के उन्होंने मना कर दिया, की रात भर की मेहनत के बाद तुम्हें ताक़त की ज्यादा जरूरत है. उसके साथ ही फिर हँसी मज़ाक शुरू हो गया. मैं देख रही थी की कल के बाद रजनी में एकदम फर्क आ गया है और वो उनसे चिपकी हुई है और उनके शुद्ध नं वेज जोक्स का हम लोगों के साथ मजा ले रही है. मज़ाक मज़ाक में उन्होंने मेरी जेठानी से कहा,

    "भाभी, आप को मेरे नाम का मतलब मालूम है."

    "अरे कितनी बार तो आप बता चुके है" वो बोली.

    "अरे साफ साफ कहिए ना की नये माल को देख केआरए आप की सलहज है, इससे क्या परदा. नाम क्या सीधे 'वही' दिखा दीजिए." ननद ने उकसाया.

    "अरे दिखा तो देता लेकिन बच्ची है कही भड़क ना जाए और वैसे भी अभी दिन रात सेल का देख रही है."

    "देखो तुम आपने इस नंदोई से बच नहीं पाएगी, अभी बच भी गयी ना तो होली में तो..

    शादी, सुहागरात और हवस की कहानी
     
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