शादी, सुहागरात और हवस की कहानी - 68

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Jan 8, 2017.

  1. 007

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    मैं कह रही थी ना की मेरा देवर पक्का रसिया है. उसने दुल्हन को तरह तरह से खुश किया होगा. अच्छा ये बता," अपनी उन ननद से अपनी जीत की घोषाना कर के वो फिर मेरी ओर मुखातिब हुई," सच सच बताना, मुझे लगता है मेरा देवर तेरे इस रसीले जोबन का रसिया है. है नाटो हर बार जब वो इसे पता है तो पहले हल्के से छूटा है, सहलाता है, दबाता है तब रगड़ता, मसलता है या"

    "पहले दिन तो ऐसे ही लेकिन" मेरी बात काट के मेरी ननद बोली,

    "अरे ये क्यों नहीं कहती साफ साफ की अब वो इतना मतवाला हो जाता है तेरी चूंचिया देख के की देखते ही दबोच लेता है, दबा देता है, मसल देता है. कच कच्छा के काट लेता है. ये तो देख के ही लग रहा है" और ये कह के उन्होंने मेरा आँचल मेरे ब्लाउज पर से हटा दिया. मेरे लो काट ब्लाउज से मेरे गोलाया चालक पड़ी और साथ ही मेरे उभारो पे उनके दाँत और नाखून के निशान सबके सामने थे. उन्होंने उस ओर इशारा करते हुए बोलना जारी रखा," अरे ऐसी रसीली चूंचिया होंगी तो वो तो बेबस हुई जाएगा. चलो तो तुमने ये बताया अपनी पहली चुदाई के बारे में की पहले तेरे दूल्हे ने, तेरी कसी कुँवारी बुर् में पहले एक उंगली और फिर दो उंगली डाल के चोदा और वैसलीन लगाई. और फिर जब तुम चुदवाने के लिए बेचैन होकर आपने चूतड़ पतकने लगी तो तुम्हारी टांगे उसने आपने कंधे पे रख के, तुम्हारी दोनों कलाई कस के पकड़ के, तुम्हारे होठों को आपने होंठ से दबा के तुम्हारे मुंह में जीभ घुसेड़ के तुम्हारी कच्ची चुत में अपना मोटा लंड पेल तुम्हें चोद दिया और तुम्हारी चुत फॅट गई. साथ ही पहले तो तुम्हारी चूंचिया वो सहलाता रहा और फिर कस के खूब रगड़ाई मसलाई की. एक बार तुम्हारी तुमने खुद अपनी टांगे फैला के उसे बुला के चुड़वाया. है ना," मैं क्या बोलती. फिर तो उन दोनों ने मिल के जैसे पुलिस वाले कबूल वाते है जो जुर्म किया हो और जो ना किया हो वो सबसब कुछ कबूलवा लिया.

    लेकिन उससे मेरी रही सही झिझक भी खत्म हो गई. और उसके साथ तो जैसे 'चुदाई पूरण' चालू हो गया. और ननंदे भी क्योंकि अंदर सिर्फ़ उनकी भाभीया ही तो थी,

    खूब खुल केओर उस के साथ ही एक नया ग्रुप बन गया शादी शुदा और कुँवरीयो का.

    अंजलि ने जब कुछ कहा तो मेरी जेठनियो को तो छोड़िए, मेरी शादीशुदा ननंदे भिलेकिन वो भी चुप होने वाली कहाँ,उसने मुझे छेड़ते हुए कहा, की अरे भाभी की तो बुरी.. उसकी बात काट के मेरी एक जेठानी बोली,

    "अरे साफ साफ क्यों नहीं कहती, की भाभी की बुर् की बुरी हालत हो गयी, लेकिन ज़रा आपने बुर् की हालत सोच ना. अब तुम्हारी भाभी को तो चुदाई का लाइसेन्स मिल गया, आपने सैया से जब चाहे जितनी बार चाहें, जहां चाहे चुड़वाएँ,

    "अरे सिर्फ़ सैया का ही नाम थोड़े उस लाइसेन्स पे लिखा है. सैया तो खाने का में कोर्स है साथ में चटनी और आचार भी तो है, नंदोई और देवर.." किसी ने जोड़ा और सब लोग हँसने लगे. मेरी उन जेठानी ने बात जारी रखी,

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    "अरे और क्या, सलहज पे तो नंड़ोई का पूरा हक है, जिस साले की बहन ना छोड़ी, उस की बीबी पे थोड़ा बहुत तो, लेकिन तुम अपना सोचो. तुम्हारी भाभी की बुर् में तो जब भी खु.जाली मचेगी, वो कुछ बहाना बना के ऊपर कमरे में और वहां उन्हें वो खड़ा तैयार मिलेगा.लेकिन अब ये सब हाल सुन के तुम्हारी बुर् तो गीली हो गयी होगी, तो फिर अब बात रो में जा के उंगली या मोटी केंडल."

    "अरे आज कल बैगान का भी सीज़न चल रहा है. लंबे मोटे चिकनी" और सब लोग हंस पड़े लेकिन अंजलि का साथ देती हुई बहुत सीरियस्ली मैं बोली,

    "अरे इन सब चीज़ों की जरूरत नहीं है, मेरी प्यारी ननदों को. आख़िर इनका ख्याल अगर इनकी भाभी नहीं रखेंगी तो कौन रखेगा. कल चौथी लेकर मेरे दोनों भाई आ रहे है, संजय और सोनू जिनसे इसकी पक्की यारी है. अब बस24 घमते इंतजार कर लो, फिर तो इसमें से किसी चीज़ की जरूरत नहीं पड़ेगी. जितनी बार चाहे उतनी बार,

    "सच में भाभी," उस के चेहरे पे तो 1000 वात का बल्ब जल गया और सब लोग मुस्कराने लगे.

    "और क्या एक दम सच. तुम जितनी बार चाहो, मेरे भाइयों से उतनी बार करवनावो एक बार भी मना नहीं करेंगे. किसके साथ करावोहगी संजय के साथ या सोनू के साथ या चाहो तो दोनों के साथ." बिचारी की हालत खराब हो गयी, लेकिन उसका साथ देने के लिए दुलारी मैदान में आ गयी. वो चालू हो गयी,

    "..भौजी, अरे आपने भाई की बात छोड़िए. अरे हमारे भैया ने तो चोद चोद के तुम्हारी बुर् का हलुवा बना दिया है, टाँग फैला के चल रही हो. मसल मसल के काट काट के तुम्हारी ई चूंचियो किलेकिन हम आपने भाई को क्यों बुरा कहे. तुम्हारी ई चीक्कन गोर गोर गालवा देख के मान तो लालचाई जाई, और फिर ये गुलाबी रसीले होंठ.

    क्यों खूब चुसवाई हो ना होंठ के रस,और फिर ई जवानी के रस से चलकात, मस्त मस्त चूची और कसी कसी बुर्. खूब चूची पकड़ के दबे के छोड़वाई होगी, है ना.

    चूतड़ उठा उठा के गपा गेप लंड घोंटी होगी रात भर.हाल तो मुझे पूरा मालूम है,

    लेकिन सब तुम्हारे मुंह से सुन-ना चाह रहे है वरना मैं सुने देती की कैसी चुड़वासी हो तुम और कैसे हचक के चोदा भैया ने तुमको.. अरे लंड घोंटने में नहीं शर्म - खचाखच चुदवाने में नहीं शर्म - तो फिर चुदाई बोलने में कौन सी शर्म लग रही है"

    "अरे नयी दुल्हन है थोड़ा तो सरमाएगी ही, मुंह से बोलने में कुच्छ" मेरी एक जेठानी ने मेरा बचाव किया. लेकिन दुलारी फूल फार्म पे थी. वो चालू रही,

    "अरे उही मुंह सेक्यो अभी लौंडा चूसी हो की नहीनह्ी चूसी हो तो चूमोगी भी चतोगी भी और चुसोगी भी उसी मुंह से तो बोलने में का शर्म. अरे बेचारी ननद पूछ रही है तो बातें दो ना खुल के कैसे कैसे मजा आया सईयाँ के स्म्ग चुदवाने में. अगर एक बार बोल दो ना भाभी तो "

    "ठीक है रख..

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