वो इश्क़ जो हमसे रूठ गया - 9

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Jan 9, 2018.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

    Joined:
    Aug 28, 2013
    Messages:
    138,656
    Likes Received:
    2,147
    http://raredesi.com भी और बहुत कुछ चाहिये होता है. त्ँहन यहाँ से भागने का मतलब है के मीयर्रा भाई जरूर हमारे पीछे अपने आदमी भाईजे गी या पुलिस को लगाई गी ऐसे मैं कुछ अर्से के लिए किसी एक जगा पे रहना ना-मुमकिन है, हमें मुसलसल भागना होगा तब तक जब तक मामला कुछ ठंडा नहीं हो जाता. 10 हज़ार के साथ हम कितना भाग सकन गे? इतना बड़ा खतरा लेन का क्या फायदा होगा फिर अगर हम पकड़े जाएँ?". अभिनव ने उसे समझते हुए कहा

    "तो फिर हमें क्या करना चाहिये?"

    "मैंने अभी तक सिर्फ़ भी.कॉम क्या है और उसकी बिना पे कोई अच्छी नोकरी मिलना संभव नहीं है. मुझे कम आज़ कम में.कॉम करना होगा और साथ मैं हे कोई छोटी मोटी नोकरी भी कर लूँ गा अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए लेकिन हमारा खाना पीना रहना और भी किए तरह के खर्चे होते हैं उसके लिए हमें काफी सारी पैसे चाहयेन. इतने के कम से कम 2,3 साल तक तो हमें कोई मसला ना हो, एक दफा मेरा में.कॉम हो जाए फिर मुझे कोई अच्छी नोकरी भी मिल जाएगी और फिर हम आराम से अपनी जिंदगी गुजार सकते हैं"

    "लेकिन इतने पैसे आए गे कहाँ से?". मीना ने परेशान लहज़े मैं कहा

    "मैंने भी बहुत सोचा है इसे बारे मैं और काफी सोचने के बाद मुझे एक हे तरीका नज़र आ रहा है. हमें चोरी करनी पड़े गी". अभिनव ने रुक रुक कर कहा

    "क्या? चोरी?". अभिनव की बात सुन कर हेरानगी के मारे मीना का मौह हे खुल गया

    "हाँ चोरी, ताकि हमारे पास इतने पैसे हूँ के अगर हम यहाँ से भाग भी जाएँ तो हमें कोई मुश्किल ना हो"

    "लेकिन कहाँ पे? और हम कोन सा माहिर हैं चोरी करने मैं? अगर पकड़े गये तो?". मीना को अभी तक समझ नहीं आए थी के वो चोरी कैसे कर सकते हैं

    "बस थोड़ी से हिम्मत चाहिये, हम कहीं बाहर नहीं यहीं इसी घर मैं चोरी कारण गे". अभिनव ने जैसे एक पहाड़ फोड़ा था उसके सर पे

    "क्या? इसी घर मैं?". अब की बार तो मीना की हल्की सी चीख निकल गयी

    "तुम सुनो तो सही, मुझे याद है के मीयर्रा भाई के कमरे मैं एक तिजोरी थी, जिस मैं वो अपना सारा ज़ेवेर रखती है, हमें बस किसी तरह उस तिजोरी से ज़ेवेर निकलना है". अभिनव ने उसे अपना प्लान बताया

    "लेकिन ये ना-मुमकिन है, घर के अंदर इतने लोगों के होते हुए उस तिजोरी तक फुँचना ना-मुमकिन है और वैसे भी उस तिजोरी की चाबी मीयर्रा भाई अपने ब्लाउज मैं रखती है हर वक्त. अभिनव उस तिजोरी से ज़ेवेर निकलना किसी भी तरह संभव नहीं है". मीना ने उदास लहज़े मैं कहा

    "देखो अगर हम सोच समझ कर सारा काम कारण तो ये काम हो सकता है. मीयर्रा भाई नहाने तो जाती होगी ना, तुम्हाइन बस ये धीयाँ रखना है के वो किस समय नहाने जाती है, जब वो नहाने जाती होगी तब तो चाबी बाहर निकलती होगी ना"

    "मैंने 1,2 बार देखा है, जब भी वो नहाने जाती है, अपने कमरे मैं चंदा को चोद कर जाती है और मेरा ख्याल है के चाबी भी वो वहीं उसी के पास रख के जाती है नहाने". मीना ने कुछ सोचते हुए कहा

    "जबरदस्त, फिर तो हमारा काम और भी आसान हो गया". अभिनव ने खुश होते हुए कहा

    "मगर कैसे? उसके नहाते हुए तो हम तिजोरी से ज़ेवेर नहीं निकल सकते. अगर तुम्हारा ख्याल है के चंदा इसे मामले मैं हमारा साथ देगी तो बहुत मुश्किल है. उसे हम से जितनी भी हमदर्दी हो वो कभी मीयर्रा भाई के खिलाफ कुछ नहीं करे गी". मीना ने एक बार फिर ना समझे लहज़े मैं कहा

    "हमें तब चोरी नहीं करनी चोरी का इंतईज़ाम करना है. जैसे ही मीयर्रा भाई नहाने जाए, तुम चंदा के पास जाना और उसे कहने के मैंने बुलाया है, इतने मैं तुम्हाइन बस ये करना है के साबुन के उप्पर उस चाबी को अच्छी तरह चिपका के चाबी वहीं पे रख डैनी है. इसे से ये होगा के चाबी का पूरा निशान साबुन पे आ जाए गा और हम वैसी ही एक चाबी बाज़ार से बनवा लाइन गे". अभिनव ने अब अपना प्लान उसे बताते हुए कहा

    "ये काम तो शायद चंदा को वहाँ से भाईजे बेघार भी मैं कर लूँ, लेकिन फिर हम चोरी कब कारण गे?". अब की बार मीना ने उसका प्लान समझते हुए कहा

    "किसी ऐसी रात जब या तो कोई बड़ा प्रोग्राम हो और मीयर्रा भाई के साथ साथ ज्यादा तर लोग उप्पर कोठे पे हूँ या फिर घर से बाहर गये हुए हूँ". अभिनव ने सोचते हुए लहज़े मैं कहा

    "मगर इसे मैं तो बहुत खतरा है"

    "खतरा तो है, लेकिन अब इसकी सिवाय और कोई रास्ता नहीं, हमें अपनी आज़ादी के लिए इतना खतरा तो लाना हे पड़े गा"

    "अभिनव तुम्हारे साथ के लिए तो मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ, तुम सोच भी नहीं सकते मैं तुमसे कितनी मोहब्बत करती हूँ, मुझे तो ये सब ख्वाब जैसा लग रहा है के मैं तुम्हारे साथ हूँ गी, अगर ये सकच हो गया तो मुझे भगवान से और कुछ नहीं चाहिये". मीना अब की बार उसके सीने से आ लगी

    "मीना अगर हमारा प्लान कामयाब हो गया तो हम दोनों का ख्वाब सुकछ हो सकता है". अभिनव ने अपना बाज़ू उसके कंधे पे रख के ज़ोर से उसे अपने साथ लगा लिया.

    अभिनव ने जैसे हे मीना को अपने साथ लगाया तो उसकी कमीज़ का बड़ा सा गला थोड़ा और भी खुल गया, और खुद बीए खुद उसकी नज़र उसके क्लीवेज पे टिक गयी. उस रात तो उस ने दूर से हल्का सा नज़ारा देखा था मगर आज तो इतने करीब से ये नज़ारा देख कर तो जैसे उसके अंदर हलचल सी मच गये थी. उस ने और ज़ोर से मीना को अपने साथ जकड़ लिया और वो तो जैसे घुल रहे थी उसके साथ लगे. अभिनव का दिल चाह रहा था के वो उसके गले मैं हाथ डाल के उसके उभरून की नर्मी महसूस करे. उस ने आहिस्ता से उसका चहरा उप्पर उठा कर अपने होंठ उसके होठों पे रख दिये. दोनों हे अनाड़ी थे कुछ देर तो बस होंठ हे चूमते रहे एक दूसरे के फिर अचानक अभिनव ने अपना मौह खोल कर मीना की..
     
Loading...

Share This Page