वो इश्क़ जो हमसे रूठ गया - 7

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Jan 9, 2018.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

    Joined:
    Aug 28, 2013
    Messages:
    136,908
    Likes Received:
    2,133
    http://raredesi.com ने उसे बहुत कुछ सोचने पे मजबूर कर दया था. मगर सब से बड़ा सवाल जो उसके सामने था के ये सब होगा कैसे? वो तो अब तक इतने पैसे भी जमा नहीं कर पाया था के खुद को आज़ाद करा सके. चंदा उसकी मदद तो करती रही थी लेकिन वो सब कुछ मीयर्रा भाई से चुप कर करती थी ऐसे मैं वो कोई ज्यादा पैसा उसे नहीं दे सकती थी, बस थोड़ा बहुत पैसा दे दया करती थी और बाकी खर्चा वो तूतिओन्स पढ़ा के पूरा कर लेता था लेकिन उस से बस उसकी पढ़ाई का हे खर्चा मुश्किल से निकल पता था. ऐसे मैं मीना को भी अपने साथ ले कर भागना और मीयर्रा भाई से दुश्मनी लाना बहुत बड़ा खतरा था. लेकिन मीना का इसे तरह वहाँ आना उसे एक और राह भी दिखा रहा था, लेकिन उसे जो भी करना था बहुत सोच समझ कर करना था क्यों के उसे मोक़ा एक हे बार मिलना था बार बार नहीं. नींद कहीं बहुत दूर जा चुकी थी, अब तो वो सिर्फ़ एक हे बात सोच रहा था के उसे आगे आने वाले दिनों मैं अब क्या करना है.

    "सिकेण्दर, मीना पे मैंने बहुत खर्चा क्या है, अभी तो मेरा आधा पैसा भी वसूल नहीं हुआ, अब तो कमाने के दिन आए हैं". सिकेण्दर मीयर्रा भाई के कोठे पे बैठा उस से आने वाले प्रोग्राम के बारे मैं बात कर रहा था

    "फिक्र क्यों करती हो मीयर्रा भाई, तुम ने इतना सोचा भी नहीं होगा जितनी कमाई होने वाली है तुम्हारी अब". सिकेण्दर ने शैतानी मुस्कुराहट के साथ कहा

    "अरे चल हॅट, मैंने बारे बारे ठाकुरों को निचोड़ के फैंक दया है, तेरा ये ठाकुर वीरेंदर क्या चीज़ है? ऐसे ठाकुरों को मैं बहुत अच्छी तरह जानती हूँ, इनको बस आयशी चाहिये, पैसे के मामले मैं एक दम बानिए होते हैं ये". मीयर्रा भाई ने पानी चबाते हुए कहा

    "अरे मीयर्रा भाई, तुम जानती नहीं हो ठाकुर वीरेंदर को. पैसा उसके पास इतना है के कुछ ना भी करे तो सारी जिंदगी आराम से बैठ के कहा सकता है और तब भी खत्म नहीं होगा. दिल का बहुत बड़ा है पर एक दम घमंडी है, बहुत नाज़ है उसे अपने ठाकुर होने पे"

    "लेकिन तू तो कहता था के उसकी मान भाग गयी थी. इतना हे पैसा था उसके बाप के पास तो उसकी मान क्यों चोद कर भाग गयी उसे?"

    "अरे उसके बुड्ढे बाप को तो चस्का लग गया था जवान लड़कियों का. हर साल किसी ना किसी जवान लड़की से शादी कर लेटा था. वीरेंदर की मान तब 19 की होगी जब उसके बाप ने उस से शादी की. बुड्ढे को कब तक बर्दाश्त करती? इसे लिए अच्छा ख़ासा माल जमा कर के भाग गयी किसी और के साथ उसे चोद कर"

    "तो फिर तूने क्या सोच रखा है? मैं मीना की शादी नहीं करने वाली उसके साथ, हाँ"

    "अरे शादी करने का किस ने कहा है? वीरेंदर को तो शादी के नाम से हे चिद्ड़ है"

    "तो फिर?". मीयर्रा भाई के लाज़े मैं हेरानगी साफ थी

    "अपनी मीना को तो देख कर अच्छे अचों की राल टपकने लगती है मीयर्रा भाई. वीरेंदर औरत से भले हे जितनी नफरत करता हो लेकिन उसकी सब से बड़ी कमज़ोरी भी औरत हे है. साला जब भी कोई खूबसूरत लड़की डैखहता है कुत्ते की तरह राल टपकने लगती है उसकी. हम ने तो बस एक बार दीदार करना है मीना का, फिर देखो कैसे दम हिलता उसके पीछे पीछे आता है". सिकेण्दर ने अपना प्लान बताते हुए कहा

    "क्या सच मैं, फूंस जाए गा वो तेरे जाल मैं?"

    "कैसे नहीं फुनसे गा? सालों से जनता हूँ उसे, कब से सोच रहा हूँ के कोई मोक़ा मिले और लंबा हाथ मारों मगर अब तक ऐसा मोक़ा नहीं मिला था मुझे. पहली बार जब मीना को देखा था तब हे मैंने सोच लिया था के यही मोक़ा है उस से पैसे निकलवाने का"

    "अगले हफ्ते मीना का डांस प्रोग्राम है उसके फार्म हाउस पे, मुझे पूरा यकीन है जैसे ही वो मीना को डैखहे गा पागल हो जाए गा उसे पाने के लिए. तुम बस मीना को अच्छी तरह समझा डायना, मुझे पता है के मीना से उसका दिल इतनी जल्दी नहीं भरे गा और यही मोक़ा होगा, जब हम उस से बहुत सारा पैसा निकलवा सकते हैं. इतना पैसा के तुम ने सोचा भी नहीं होगा". सिकेण्दर के चेहरे पे एक शैतानी मुस्कुराहट थी

    "मीना की फिक्र तुम ना करो, उसे तो मैं अच्छी तरह समझा के हे भैईज़ों गी. तेरा क्या अंदाज़ा है, मीना का नाथ उतरने के कितने पैसे दे गा?"

    "अगर उसे पसंद आ गयी तो जो तुम बोलो गी वो देगा. मेरा ख्याल है 40,50 लाख तक तो मिल हे जाएँ गे और उसके एलवा, जितना समय मीना उसके साथ गुजरे गी, तब मीना उस से जितना हो सके ज़ेवेर भी खरीद सकती है. मीयर्रा भाई अंदाज़न 1 क्रोरे तक कमा सकते हैं हम एक हे झटके मैं". सिकेण्दर की बात सुन कर तो मीयर्रा भाई का मौह खुला का खुला रही गया

    "अगर ऐसा हो गया तो तुझे गुरु मान लोन गी मैं अपना"

    "हहा. बस मेरा 30% याद रखना, और ये तो मैंने अंदाज़ा बताया है, हो सकता है इसे से भी ज्यादा कमाने का मोक़ा मिल जाए हमें". सिकेण्दर ने सोचते हुए लहज़े मैं कहा और मीयर्रा भाई आने वाले दिनों का सोच कर खुश होने लगी. उस ने तो सोचा भी नहीं था के मीना के कोई इतना ज्यादा दाम भी लगा सकता है

    ******************************

    पूरा हफ्ता अभिनव ने सोचते हुए गुजारा था, जिस रात से मीना उस से मिल कर गयी थी वो मुसलसल सोचों मैं उलझा हुआ था. कभी उसे लगता था के जो प्लान उस ने बनाया है वो एक दम सही है, मगर फिर दूसरे हे पल उसे लगता था के जो वो सोच रहा है वो करना तकरीबन ना-मुमकिन है, जितना खतरनाक प्लान उस ने बनाया था अगर वो पकड़ा गया तो उसका हाशर बहुत बुरा होने वाला था. कई दिन वो इसी सोच मैं उलझा रहा के उसे अपने प्लान पा अमल करना चाहिये या नहीं, आख़िर कार बहुत दिन सोचने के बाद भी उसे कोई दूसरा रास्ता नज़र ना आया, जैसी जिंदगी वो चाहता..
     
Loading...

Share This Page