वो इश्क़ जो हमसे रूठ गया - 6

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Jan 9, 2018.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

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    http://raredesi.com विस्की का घूँट भरते हुए कहा

    "मैं तो कब से कह रहा हूँ के मीयर्रा भाई के कोठे पे चलो वहाँ तो बिन पाइ ही नशा चढ़ जाता है"

    "तुम्हाइन पता है मुझे कोतों पे जाना पसंद नहीं". वीरेंदर ने अपना गिलास भरते हुआ जवाब दया

    "अरे यार वहाँ से और्तन तो मँगवाते हो अपनी आयशी के लिए तो वहाँ जाने मैं क्या बुराई है फिर?"

    "ठाकुर वीरेंदर सींग अपनी प्यास भुजने के लिए कुँवइं के पास नहीं जाता, कुँवा ठाकुर विरेदर सींग के पास आता है उसकी प्यास भुजने के लिए". वीरेंदर के लहज़े मैं गरूर साफ झलक रहा था

    "वो!. ये तो किसी फिल्म के डाइलॉग से कम नहीं". सिकेण्दर ने वीरेंदर के जवाब पे झूम कर कहा

    "फिल्मों मैं तो नोतंकी वाले काम करते हैं, मेरी रागों मैं ठाकुर खंडन का खून है. बादशाह हूँ मैं अपनी इसे सलतनत का". वीरेंदर ने अपने हाथ को घुमा कर अपने आलीशान बंगले की तरफ इशारा क्या

    "ऐसा बादशाह जिस की मान किसी और के साथ भाग गयी". सिकेण्दर ने दिल हे दिल मैं सोचते हुए कहा. उसे पता था ये बात वीरेंदर के सामने कहना मतलब अपनी मौत को आवाज़ डायना था इसे लिए उस ने दिल हे दिल मैं इसे बात का मजा लिया

    "चलो यार बहुत देर हो गयी, मैं तो अब चलता हूँ". सिकेण्दर ने अपना गिलास खत्म कर के उठ'ते हुए कहा

    "वो सारा मामला तय कर लिया है ना मीयर्रा भाई से? डांस प्रोग्राम मैं कोई रुकावट नहीं होनी चाहिये, मैं सब को जुबान दे चुका हूँ के बहुत शानदार प्रोग्राम होगा"

    "तुम भी-फिक्र रहो, मेरी मीयर्रा भाई से बात हो गयी है, अड्वान्स पेमेंट भी कर दी है. मीना को देख कर तुम्हारे होश भी उड़ने वाले हैं, बस तैयार रहो". सिकेण्दर ने हंसते हुए कहा

    "हम तो इंतिज़ार मैं हैं, दीदार तो करयो उस हुस्न की देवी का, पसंद आ गयी तो मालामाल कर डॉन गा उसे भी और मीयर्रा भाई को भी". सिकेण्दर उसका जवाब सुन कर हंसते हुए चला गया जब के वीरेंदर आने वाले दिनों का सोच कर अपने लिए एक और पेग बन'ने लगा

    ******************************

    "मीयर्रा भाई ने बहुत साल पहले मुझे एक औरत से खरीदा था, मैं खुद भी नहीं जानती के मेरे मान बाप कोन हैं, मैंने तो हमेशा से उस औरत को हे अपनी मान समझा लेकिन उस ने अपने स्वार्थ के लिए मुझे मीयर्रा भाई के हाथ बैच दया. तब से मैं यहाँ पे एक ऐसे क़ैदी परिंदे की जिंदगी गुजर रही हूँ जिस के पार काट के उसे कैद खाने मैं फैंक दया गया हो". मीना उसे अपनी जिंदगी के बारे मैं बता रही थी और हालाँकि अभिनव को उसकी बातों से कोई स्रो-कार नहीं था लेकिन उस ने उसे साफ साफ बता दया था के जब तक वो अपनी बात नहीं कर लेटी वो वहाँ से नहीं जाएगी इसे लिए वो अब चुप चाप उसकी बताईं सुन रहा था

    "3 साल पहले आप चंदा को बुलाने घर के अंदर आए थे तब पहली बार मैंने आपको देखा था, तब पहली बार मेरे अंदर एक अजीब सा नये एहसास ने जन्म लिया. तब मैं खुद भी नहीं जानती थी उस एहसास को क्या नाम डॉन लेकिन उसके बाद मुझे जब भी मोक़ा मिलता था मैं चुप चुप कर आपको देखा करता थी. मुझे समझने मैं काफी समय लगा के जो मेरे अंदर नये जज़्बे ने जन्म लिया है वो आपकी मोहब्बत का है. फिर मैंने चंदा से आप के बारे मैं सब कुछ मालूम क्या और आपकी सोच के बारे मैं जान कर मेरे दिल मैं आपके लिए मोहब्बत के साथ साथ इज्जत भी आ गयी. ऐसी जगा पे रही कर भी खुद को इसे माहौल से दूर रखना और अपने लिए एक इज्जत-डर जिंदगी का ख्वाब डैखहना हर किसी के बस की बात नहीं है. आप की सोच बहुत ऊँची और अच्छी है. और ये आप की हे सोच है जिस ने मेरे लिए यहाँ पे रहना अब और भी दुश्वार कर दया है, मेरे लिए यहाँ पे गुजारा हर एक पल अब किसी अज़ाब से कम नहीं है". मीना ये कह कर थोड़ी देर के लिए चुप हो गयी

    "तो अब तुम मुझसे क्या चाहती हो?". अभिनव ने उकताए हुए लहज़े मैं कहा

    "मैं कुछ चाहती नहीं, मैं तो बस इतना चाहती हूँ के आप मुझे अपना बना लाइन. आप नहीं जानते यहाँ पे मर्द नुमा भैईडीए आते हैं और ललचाई हुए नजरों से मुझे डैखहे हैं. आप उस तकलीफ का अंदाज़ा नहीं कर सकते जो मुझे उनके सामने नाचने से होती है". मीना की बात सुन के पहली बार अभिनव चौंका, इतने सालों मैं आज पहली बार किसी तवायफ़ के मौह से वो बात निकली थी जो वो हमेशा सोचा करता था

    "मैं जानती हूँ ये सब इतना आसान नहीं है, आप तो शायद अब तक जानते भी नहीं थे के मैं आप से मोहब्बत करती हूँ, एक दम से ये सब सच मान लाना शायद आप के लिए आसान नहीं है. मैं आप के साथ ज़बरदस्ती नहीं कर रही, मैं तो बस ये चाहती हूँ के आप इसे बारे मैं सोच कर मुझे जवाब डैन, आपका जो भी जवाब होगा मुझे मंजूर होगा. मेरी किस्मत का फैसला अब आपके हाथ मैं है". अभिनव चुप चाप उसकी बताईं सुन रहा था

    "अब मैं चलती हूँ, मैं बस आप को यही सब बताना चाहती थी". ये कहते हुए मीना ना दोबारा वो चादर पहन ली, जिस मैं लिपट कर वो वहाँ आए थी

    "मुझे आप के जवाब का इंतिज़ार रहे गा"

    ये कह कर मीना तो वहाँ से चली गयी और अभिनव अपने बिस्तर पर दोबारा लाइट गया. उस ने कभी सोचा भी नहीं था के उसकी जिंदगी मैं ऐसा भी कोई मोड़ आए गा. अब तक तो वो सिर्फ़ अपने बारे मैं सोचता आया था के कैसे उसे इसे नर्क से निकलना है लेकिन आज मीना उसके लिए सोच का एक नया दरवाजा खोल गयी थी. ये सच था के उस ने मीना जैसी खूबसूरत लड़की आज तक नहीं डैखी थी, वो सच मैं कोई शहज़ादी सी लगती थी, और वैसे भी आज तक लड़कियों के मामले मैं वो बिलकुल कोरा हे था, उस ने किसी लड़की को इतने घोर से देखा भी नहीं था. लेकिन आज मीना के इजहार-ए-मोहब्बत..
     
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