वो इश्क़ जो हमसे रूठ गया - 13

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Jan 10, 2018.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

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    http://raredesi.com काम से फारिघ् होने के बाद उस ने जब मैं से चाबी निकली और मीयर्रा भाई की तिजोरी खोलना शुरू क्या, चाबी लगाने के बाद उसे थोड़ी मेहनत करनी पड़ी लेकिन आख़िर कार वो तिजोरी खोलने मैं कामयाब हो गया. तिजोरी खोलने के बाद जिस चीज़ पे उसकी सब से पहले नज़र पड़ी वो ये थी के तिजोरी के अंदर एक और छोटा सा खाना था जिसे लॉक लगा हुआ था. ये बात उस ने और मीना ने सोची ही नहीं थी के तिजोरी के अंदर भी कोई लॉक हो सकता. उस ने बाकी की तिजोरी पे नज़र डाली तो उसे वहाँ काश के अलावा और कुछ नज़र ना आया. उस ने सोचा था के शायद अंदर बहुत सारा ज़वर होगा लेकिन वो शायद उस छोटे खाने मैं रखा हुआ था. अब तो जो भी उसके सामने था उसी पे गुजारा करना था, उस ने सारा काश अपने साथ लाए एक थैले मैं डालना शुरू कर दया. काश अगर बहुत ज्यादा नहीं था इतना कम भी नहीं था, उसके अंदाज़े के मुताबिक़ 10 लाख से कम नहीं था. थैले मैं पैसे डालने के बाद उस ने फिर से अपना मोबाइल को देखा अभी तक उसे मीना का एसएमएस नहीं आया था जिस का मतलब था के अभी उसे बाहर नहीं निकलना था. उस ने वहीं खड़े खड़े सोचना शुरू कर दया के किसी तरीके से वो छोटा सा लॉक खोला जा सकता है या नहीं

    ******************************

    मीना को जैसे ही अभिनव का एसएमएस मिला था वो जल्द से जल्द नीचे जाना चाहती थी मगर जब तक सारी लड़कियाँ आने वाले मेहमानों के सामने जा कर सलाम नहीं कर लेटी देन तब तक वहाँ से हिलना मुश्किल था. आख़िर कार सारी लड़कियाँ फारिघ् हुवें तो जिन लड़की ने नाचना नहीं था वो सारी नीचे जानी लगें. मीना भी जल्दी से सीढ़ियाँ उतरने लगी, बाकी की लड़कियाँ नीचे उतार कर अपने कमरों की तरफ जाने लगें जब के मीना बजाए उनके साथ जाने के मीयर्रा भाई के कमरे की तरफ जाने लगी

    "मीना तुम कहाँ जा रही हो?". एक लड़की ने उसे दूसरी तरफ जाता देखा तो पूंछ लिया

    "मुझे कुछ काम है उस तरफ, चंदा भाई ने अपने कमरे से कुछ मँगवाया है". मीना ना जल्दी से उसे जवाब दया

    मीना उस लड़की को जवाब डायने के बाद तकरीबन भागती हुए मीयर्रा भाई के कमरे तक पहुंची. उस ने वहाँ पहुँच कर फौरन अभिनव को एसएमएस क्या

    "बाहर कोई नहीं है जल्दी से बाहर आओ"

    एसएमएस करने के बाद वो अभिनव के बाहर आने का इंतिज़ार करने लगी

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    कमरे के अंदर अभिनव वहीं पड़े एक तार से तिजोरी के अंदर वाला लॉक खोलने की कोशिश कर रहा था. अभी वो उसे खोलने मैं मसरूफ था जब उसका मोबीला वाइब्रट हुआ. उसे अंदाज़ा हो गया के मीना ने उसे मेसेज क्या होगा, लेकिन वो एक आखिरी कोशिश करना चाहता था इसे लिए उस ने और तैइज़ी से उस लॉक को खोलने की कोशिश शुरू कर दी. थोड़ी देर बाद उसका मोबीला फिर से वाइब्रट हुआ, उस ने जब से मोबाइल निकल के देखा तो मीना का दूसरा एसएमएस भी आया हुआ था

    "तुम क्या कर रहे हो? जल्दी से बाहर आओ इस से पहले के कोई आ जाए"

    उस ने वहीं खड़े हो के कुछ सेकेंड्स के लिए सोचा, तकरीबन 10 लाख उसके पास थे जो अगर बहुत ज्यादा नहीं तो कुछ कम पैसे भी नहीं थे. उस ने सोचा के अंदर रहना खतरे से खाली नहीं था, जो कुछ उसके हाथ लग गया था उतना काफी था अब उसका वहाँ से निकल जाना बहतेर था. उस ने तिजोरी दोबारा बंद की और मीना को एसएमएस क्या के वो बाहर आ रहा है. उस ने आहिस्ता से कमरे का दरवाजा खोला तो बाहर उसे मीना खड़ी नज़र आई उसकी शकल से उसके अंदर की गबराहट साफ नज़र आ रही थी

    "जल्दी करो बाहर आओ, तुम क्या सो गये थे अंदर?". मीना ने उसे डैखहते ही कहा

    "नहीं, हम से गलती हो गयी, तिजोरी के अंदर एक और लॉक लगा हुआ था. मैं उसे खोलने की कोशिश कर रहा था". अभिनव ने कमरे से बाहर निकलते हुए कहा

    "तो क्या तिजोरी के अंदर कुछ नहीं था?"

    "नहीं कुछ पैसे मिले हैं, गुजारा हो जाए गा". वो दोनों बताईं करते अब अभिनव के कमरे की तरफ जा रहे थे

    "अब क्या करना है?". मीना ने उस से पूछा

    "तुम अंदर जाओ और अपने कुछ कपड़े और बाकी जो हाथ लगे बैग मैं डाल कर मेरे कमरे मैं आ के बैठ जाओ, मैं बाहर जाता हूँ और टैक्सी ले कर आता हूँ". अभिनव ने जल्दी जल्दी उसे आगे का प्लान बताया

    "लेकिन दरवाजा पर जो चौकीदार खड़ा है वो मुझे कैसे बाहर जाने देगा?"

    "तुम उसकी फिक्र ना करो मैं वापस आ कर उसे कहों गा के जा के चंदा को बुलाए मुझे उस से काम है जैसे ही वो अंदर जाए गा हम निकल जैन गे". अभिनव ने उसे समझते हुए कहा

    मीना उसकी बात सुन के जल्दी से अपने कमरे की तरफ तरफ गयी. उस ने पहले से ही एक बैग तैयार क्या हुआ था जिस मैं उस ने बाकी अपना बच्चा हुआ थोड़ा बहुत समान डालना शुरू कर दया. उसके दिल मैं एक अजीब सा डर और खुशी थी, उस ने कभी सोचा भी नहीं था के आज़ादी का एहसास कैसा होता है. बस थोड़ी देर और फिर वो हमेशा के लिए आज़ाद होगी, एक खुशियों भारी जिंदगी बाहर उसका इंतिज़ार कर रही थी. जहाँ पे कोई गंदी नज़र से डैखहने वाला नहीं होगा, जहाँ उसे सोते हुए इसे बात का डर नहीं होगा के आने वाली किसी रात भी कोई मर्द नुमा जानवर उसके जिस्म से खैइले गा. ऐसी जिंदगी जिस मैं एक बहुत प्यार करने वाला इंसान उसका साथी होगा, जो उसकी झूली को खुशियों से भर देगा. उस ने अपना समान बैग मैं डाल के एक नज़र अपने कमरे को देखा, अपनी जिंदगी के कई साल उस कमरे मैं गुजरे थे उस ने, पल पल डरते हुए, अपनी आने वाली जिंदगी का सोच कर उसका दिल चाहता था वो उसी कमरे के किसी कोने मैं हमेशा के लिए चुप जाए. और आज वो उस कमरे को एक खुशी के एहसास के साथ चोदे जा रही थी.

    वो अपने कमरे..
     
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