वो इश्क़ जो हमसे रूठ गया - 12

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Jan 9, 2018.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

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    http://raredesi.com बहाना उस ने बनाया था उसे अब पूरा भी करना था.

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    "चाबी तो मैंने बनवा ली हां अब बस जिस रात कोई बड़ा फंक्षन होगा हम यहाँ से हाथ साफ कर के निकल चलाईं गे". अभिनव मीना को आने वाले दीनों का प्लान समझा रहा था

    "हमारे पास ज्यादा वक्त नहीं है. 2 दिन बाद मुझे किसी ठाकुर वीरेंदर के फार्म हाउस जाना है और मीयर्रा भाई की बातों से लग रहा है वो मुझे आसानी से वापस नहीं आने देगी वहाँ से, जो भी करना है उस से पहले करना होगा"

    "लेकिन मीना सब के होते हुए चोरी करना आसान काम नहीं. मुझे ये भी पता नहीं के घर के अंदर कितने लोग हैं और कोन किस वक्त कहाँ होता है"

    "उसकी फिक्र तुम ना करो, ये सब मैं संभाल लूँ गी, बस किसी भी तरह हमें कल यहाँ से जाना होगा वरना मैं यहाँ से कभी नहीं निकल पांव गी"

    "मीना तुम जज़्बाती हो रही हो. देखो अगर इसे ठाकुर वीरेंदर का फंक्षन इतना ही जरूरी है तो तुम वहाँ हो आओ. जब वहाँ से वापस आ जाओ गी हम तब चोरी कर लाइन गे और भाग जैन गे". अभिनव ने उसे समझना की कोशिश की

    "तुम समझते क्यों नहीं हो? अगर मैं वहाँ गयी तो वो मुझे नहीं चोदे गा, किसी भूखे जानवर की तरह नोंच डाले गा मेरे जिस्म को और मेरी रूह को". मीना ने इसे बार चीख कर कहा, उसकी आँखों से आँसू तवातार के साथ बह रहे थे

    "अच्छा ठीक है. तुम परेशान मत हो, हम कल ही चोरी कारण गे. मगर उसके लिए अब तुम्हाइन सारी प्लॅनिंग करनी होगी और वो दिल से नहीं दिमाग से होगी. इस लिए तुम आराम से सोच कर मुझे बतायो के चोरी कैसे होगी". अभिनव ने उसे समझते हुए कहा

    "कल घर मैं बहुत बड़ा तो नहीं लेकिन एक छोटा सा फंक्षन जरूर है. बहुत सी लड़कियाँ वहाँ मसरूफ हूँ गी, जो नीचे हूँ गी उन मैं से ज्यादा नयी लड़कियाँ हूँ गी जो मीयर्रा भाई के कमरे की तरफ जाने का सोच भी नहीं सकतें. फंक्षन शुरू होने से पहले सारी लड़कियाँ एक बार उप्पर जरूर जैन गे, और उसी टाइम तुम्हाइन मीयर्रा भाई के कमरे के अंदर जाना है. मैं तुम्हाइन मोबाइल पे जैसे मेसेज कारों तुम अपने कमरे से निकल आना, एक बार तुम कमरे के अंदर पहुँच जाओ तो कमरा अंदर से बंद कर लेना. मैं फौरन नीचे आ जायों गी और कमरे के बाहर ही हूँ गी बस तुम जल्दी से जो हाथ लगे उठा लेना और जब मैं कहों फौरन बाहर निकल आना"

    "ये सब सुन'ने मैं तो बहुत आसान लग रहा है पर करने मैं इतना आसान नहीं होगा. अगर मेरे कमरे के अंदर जाते हुए या बाहर निकलते हुए किसी ने देख लिया तो?"

    "तुम भूल रहे हो के तुम मीयर्रा भाई के बेटे हो और ये बात सब जानते हैं. और कोई ये नहीं जनता के तुम्हारे पास उसकी तिजोरी के नक़ली चाबी है और तुम अंदर चोरी करने जा रहे हो. इस लिए तुम्हाइन अंदर जाते हुए अगर किसी ने देख लिए तो का देना के मीयर्रा भाई से मिलना है तुम्हाइन और बाहर निकलते हुए कोई नहीं डैखहे गा क्यों के उस वक्त मैं खुद वहाँ पे हूँ गी, मैं तब ही तुम्हाइन बाहर आने को कहों गी जब कोई खतरा नहीं होगा और अगर फिर भी किसी ने देख लिए तो फिर भागने के सिवाय कोई रास्ता नहीं होगा हमारे पास"

    "ठीक है फिर कल रात को मिलाईं गे".अभिनव ने एक लंबी साँस लायटे हुए कहा

    "अभिनव, तुम नहीं जानते पिछले 3 साल मैं मैंने तुमसे कितनी मोहब्बत की है. तुम्हारी एक झलक जिस दिन नज़र आ जाती थी मेरा पूरा हफ्ता अच्छा गुजरता था. मैंने कभी नहीं सोचा था के तुम मेरी मोहब्बत क़बूल कर लोगे और सिर्फ़ इतना ही नहीं मुझे यहाँ से निकालने पे भी तैयार हो जाओ गी. मैं आज तक सिर्फ़ तुम से मोहब्बत करती आई हूँ पर आज के बाद तुम्हारी इज्जत मेरे दिल मैं मोहब्बत से भी ज्यादा हो गयी है. तुम वाक़ई मैं बहुत अच्छे इंसान हो". मीना उसके गले लगे अपने दिल की बातें उसे बता रही थी

    "अच्छा अब ऐसी बताईं कर के मुझे जज़्बाती ना करो, मैं ये सिर्फ़ तुम्हारे लिए नहीं कर रहा अपने लिए भी कर रहा हूँ. हम दोनों एक ही जेल मैं बंद हैं और वहाँ से निकालने के लिए एक दूसरे की मदद कर रहे हैं". अभिनव ने उसका माता चूमते हुए कहा

    "अब तुम जाओ वरना किसी को शक हो जाए गा. बस आज की रात इसे कैद खाने मैं हमारी आखिरी रात है. कल हम एक नयी जिंदगी शुरू कराईं गे, वो जिंदगी जिस के जीने का हम कब से ख्वाब देख रहे हैं"
    अभिनव के लिए एक एक पल गुजरना मुश्किल हो रहा था. मीना ने उसे जो टाइम बताया था फंक्षन शुरू होने का वो हो चुका था मगर अभी तक उसे मीना का एसएमएस नहीं आया था. वो बार बार मोबाइल उठा कर देख रहा था मगर कोई एसएमएस होता तो नज़र आता. आख़िर कार एक तकलीफ-दे इंतिज़ार के बाद मीना का एसएमएस आ ही गया. अभिनव ने फौरन मोबाइल को साइलेंट कर के जब मैं डाला और कमरे से निकालने से पहले एक बार फिर से जब मैं हाथ डाल के चेच क्या के चाबी उसके जब मैं है. कमरे से निकालने के बाद उस ने सब से पहले इधर देखा मगर जैसे मीना ने उसे बताया था वाक़ई वहाँ पे कोई नहीं था. वो जल्दी से घर के अंदर वाले हिस्से की तरफ बढ़ने लगा, बचपन के बाद वो कोई 2,3 बार ही अंदर गया था मगर वो घर इतना भी बड़ा नहीं था के वो उसके रास्ते भूल जाता इस लिए वो आराम से मीयर्रा भाई के कमरे की तरफ पहुँच गया. वहाँ पहुँच कर उस ने एक बार फिर से इधर उधर देखा के कोई उसे देख तो नहीं रहा मगर वहाँ कोई नहीं था, वो जल्दी से कमरे के अंदर पहुँच गया.

    कमरे के अंदर पहुँच के उस ने सब से पहले कमरा अंदर से लॉक कर दया, उसके बाद उस ने मीना को अपने कमरे के अंदर पहुँच जाने का एसएमएस क्या. इस..
     
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