वो इश्क़ जो हमसे रूठ गया - 11

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Jan 9, 2018.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

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    http://raredesi.com उन्होंने इसे सारे काम को समझा था उतना आसान ये बिलकुल नहीं था लेकिन उनके पास अब इंतिज़ार करने के एलवा और कोई रास्ता नहीं था.

    मीना आज भी किसी ऐसे ही मोक़े की तलाश मैं थी और चंदा को ढूंढ. रही थी जब उसे किसी ने बताया के चंदा मीयर्रा भाई के कमरे मैं उसकी मालिश कर रही है. मीना के दिमाग मैं जो सब से पहला ख्याल आया वो चाबी का हे था, इसे से अच्छा मोक़ा शायद उसे आगे मिलने वाला नहीं था. अगर मीयर्रा भाई चंदा से मालिश करा रही थी तो इसका मतलब था के जरूर उस ने आज कमरे मैं हे कपड़े उतरे हूँ गे अपने, कपड़ों के साथ तो वो मालिश करने से रही. वो जल्दी जल्दी मीयर्रा भाई के कमरे के तरफ चल पड़ी, आज उसे हर कीमत पे वो काम करना था जिस का वो इतने दिन से इंतिज़ार कर रही थी. जैसे ही वो कमरे मैं दाखिल हुई उसका शक सही साबित हुआ, मीयर्रा भाई अपने बेड पे उल्टी लेटी हुए थी और उसका जिस्म एक चादर मैं लिपटा हुआ था. लेकिन मीना की नज़र तो सब से पहले उसकी बेड के साथ पड़ी टेबल पे रखे उसके कपड़े उनके साथ रखी चाबी पे पड़ी थी. उसे पता था के हो ना हो ये तिजोरी की ही चाबी थी.

    "क्या बात है मीना? कोई काम था क्या?". चंदा ने उसे अंदर आते देख कर पूछा

    "आआयो मीना, अच्छा हुआ तुम खुद ही आ गाएँ, मैं तुम्हाइन बुलाने ही वाली थी". इसे से पहले के मीना चंदा के सवाल का जवाब डायटी, मीयर्रा भाई ने बोल कर उसकी उलझन दूर कर दी. अब उसे वहाँ बैठने के लिए कोई बहाना नहीं चाहिये था. वो चलती हुई मीयर्रा भाई के बेड के साथ आ कर खड़ी हो गयी

    "कोई काम था मुझसे आप को?". मीना की नज़रैयण टेबल पे रखी चाबी को चोरी चोरी देख रही देन, और अपने दुपट्टे मैं छुपाएं साबुन के उप्पर उसका हाथ और सख्ती से जम गया था

    "हाँ. 4 दिन बाद तुम्हाइन ठाकुर वीरेंदर के फार्म हाउस पे एक डांस प्रोग्राम के लिए जाना है. लेकिन जो बात मैं तुमसे करने लगी हूँ वो उस डांस प्रोग्राम से बहुत ज्यादा जरूरी है". मीयर्रा भाई ने वैसे ही लायटे लायटे कहा

    "ठाकुर वीरेंदर एक बहुत हे अमीर इंसान है और लड़कियों का दीवाना है. तुम्हाइन उस डांस प्रोग्राम मैं सिर्फ़ नाचने के लिए नहीं भाईजा जा रहा, तुम्हाइन वहाँ वो जलवा दिखना होगा जिसे देख कर ठाकुर वीरेंदर तुम्हाइन पाने के लिए बेताब हो जाए. तुम इसे बात के लिए खुद को तैयार कर लो के जब तुम वहाँ से वापस आओ गी तो पीछे ठाकुर वीरेंदर के दिल मैं ऐसी प्यास जगा कर आओ जिसे भुजने के लिए वो दम हिलता हुआ हमारे कोठे पे आ गिरे". मीयर्रा भाई बोलती जा रही लेकिन मीना का धीयाँ तो बस उस चाबी मैं हे अटका हुआ था लेकिन सब से बड़ा मसला तो चंदा को वहाँ से हटाने का था मीयर्रा भाई तो उल्टी लेटी बस बोल रहे थी

    "आप के ख्याल मैं वहाँ जाने से पहले मुझे उस से क्या बात नहीं कर लानी चाहिये?". अचानक मीना के ज़हेन मैं एक ख्याल आया

    "हम. क्या मतलब तुम्हारा? मैं समझी नहीं कुछ?"

    "अगर उसके पास इतना हे पैसा है तो क्यों ना हमें तैयार हो कर उस पे हमला करना चाहिये. एक हे रात मैं जब वहाँ पे बहुत सारे लोग हूँ गे शायद मैं उसे वैसा अपनी तरफ ना खेंच सकों जैसा आप चाहती हैं. तो वहाँ जाने से पहले ही उसकी प्यास अगर थोड़ी बढ़ा दी जाए तो हो सकता है वो और ज्यादा भी-क़रार हो जाए". मीना नहीं जानती थी के वो क्या बोल रही है, उसकी बात से मीयर्रा भाई पे कोई असर पड़ता है या नहीं उसका दिमाग तो बस एक हे जगा पे अटका हुआ था के किसी तरह चंदा को वहाँ से हटाया जाए

    "तुम्हारी बात मैं दम तो है लेकिन मैं चाहती हूँ के तुम्हाइन वो पहली बार उसी रात डैखहे. तुम्हाइन खास तोर पे उस रात तैयार कर के भाईजा जाए गा ऐसे रूप मैं के वो पागल हो जाए तुम्हाइन डैखहते ही"

    "मैं उसके सामने जाने की बात नहीं कर रही, अगर मुझे उसका नंबर मिल जाता तो मैं मोबाइल पे उस से बात कर के ये काम ज्यादा अच्छे तरीके से कर सकती हूँ. मुझसे बात करने के बाद मुझे डैखहने की इच्छा और ज्यादा उसके दिल मैं जगह उठे गी". वो नहीं जानती थी वो क्या बोल रही है बस दिल हे दिल मैं प्राथना कर रही थी के मीयर्रा भाई उसकी बात मान जाए

    "वो!. ये तो बड़ी ज़बरस्त बात सोची है तुम ने. मुझे खुशी है के तुम्हारे बारे मैं जो भी मैंने सोच रखा है तुम शायद उस से ज्यादा हे अक़ल्मंद हो"

    "चंदा मेरा मोबाइल ज़रा ले के आना मेरे कमरे से". चंदा उसकी अचानक फरमाइश को समझ ना सकी, अगर उसे ठाकुर वीरेंदर का नंबर चाहिये भी था तो वो उसे मोबाइल लाने को क्यों कह रहे थी लेकिन अब उस ने कह दया था तो उसे उठा के जाना हे पड़ा

    मीना फौरन मीयर्रा भाई के साथ हे बेड पे बैठ गयी और मीयर्रा भाई जो चंदा के जाने के बाद मुड़ने लगी थी, मीना ने फौरन हे उसके काँधे मसलना शुरू कर दिये और मीयर्रा भाई वैसी ही उल्टी लेटी रही. मीयर्रा भाई अब उसे ठाकुर वीरेंदर के बारे मैं सब कुछ बता रही और उसे वहाँ जा के क्या करना था लेकिन मीना के हाथ किसी मशीन की तरह चल रहे थे. एक हाथ से वो मीयर्रा भाई के काँधे दबा रही थी जब के दूसरे हाथ से उस ने साबुन झोली मैं रख के चाबी उसके उप्पर रख के ज़ोर लगाना शुरू कर दया और तब तक ज़ोर लगती रही जब तक चाबी पूरी तरह साबुन पे चाप ना गयी. अपना काम पूरा करने के बाद उस ने फौरन चाबी को अपने दुपट्टे से साफ कर के वापस उसी जगा पे रख दया जहाँ से उस ने उठाई थी. अब उसके लिए वहाँ रुकना मुश्किल था लेकिन अब उसे वहाँ रुक कर ठाकुर वीरेंदर का नंबर लाना था क्यों के जो..
     
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