वो इश्क़ जो हमसे रूठ गया - 10

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Jan 9, 2018.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

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    http://raredesi.com जुबान को अंदर का रास्ता दिखा दया. और जैसे हे दोनों की जुबान टकराई एक करेंट सा दोनों के बदन से गुजर गया.

    जैसे हे मीना की जुबान अभिनव की जुबान से टकराई, उसके तो जैसे पूरे जिस्म मैं हलचल मच गये थी, उस ने मीना की जुबान को चूसना शुरू कर दया. उसका एक हाथ मीना की कमर पे तैइज़ी से घूम रहा था जब के दूसरे हाथ से उस ने मीना के उभरून को मसलना शुरू कर दया. मीना तो आँखें बंद किये किसी और हे दुनिया मैं पहुंची हुए थी पहली बार किसी मर्द के हाथ उसके जिस्म को सहला रहे थे और उसे लग रहा था जैसे उसका जिस्म बिलकुल हल्का होता जा रहा है. अभिनव ने भी पहली बार किसी लड़की को चूहा था, उसे ने तो कभी सोचा भी नहीं था के लड़की के उभार इतने नरम भी हो सकते हैं. उसे लग रहा था जैसे मीना के उभार माखन से बने हूँ, जितना वो उनको मसलता उतना हे वो उसके हाथ से फिसलते जा रहे थे. थोड़ी देर बाद उस ने उसके गले के अंदर हे हाथ डाल दया. मीना ने कमीज़ के नीचे ब्रा पहन रखी थी, उस ने कोशिश की के ब्रा के अंदर हाथ डाल सके लेकिन ब्रा काफी टाइट थी उसका हाथ अंदर नहीं जा पा रहा था. मीना उसकी मुश्किल समझ गयी उस ने अपना एक हाथ पीछे से अपनी कमीज़ के अंदर डाल के ब्रा का हुक खोल दया. ब्रा नीचे उसकी झोली मैं जा गिरी. अभिनव के हाथ अब उसके निपल्स के साथ खेल रहे थे और जैसे ही उसके एक निप्पल को चुटकी मैं पकड़ के हल्का सा खैंचा एक सिसकारी सी मीना के मौह से निकल गयी.

    अभिनव अब पागलों की तरह उसे चूम रहा था और उसके हाथ कमीज़ के अंदर हे उसके पेंट और उभारों को सहला रहे थे. जैसे जैसे वो उसके बदन सहलाता जा रहा था मीना लज़्ज़त की नयी बुलंदी पे फुँचती जा रही थी. अभी ये खेल जारी हे था के अचानक अभिनव को एहसास हुआ के वो ज्यादा आगे बढ़ते जा रहे हैं. मीना का इसे समय उसके कमरे मैं होना, कोई भी पीछे उसके कमरे मैं जा सकता था और मीना को वहाँ ना पा कर उसे ढूनदने निकल पड़ता. अगर कोई मीना को यहाँ देख लेटा तो काफी मसला बन सकता था, उनका प्लान जो अभी शुरू हे नहीं हुआ था वो शुरू होने से पहले हे खतरे मैं पड़ सकता हां. उस ने फौरन अपना हाथ उसकी कमीज़ से निकल लिया और अपने होठों को भी उसके होठों से जुड़ा कर दया. मीना जो आँखें बंद किये बैठी थी, उसकी अचानक इसे हरकत पे उस ने आँखें खोल देन. मीना को भी पहली बार एहसास हुआ के वो क्या कर रहे थे. क्या हुआ के वो एक तवायफ़ थी, मगर इसे समय वो एक महबूबा थी, जिसे पहली बार उसके महबूब ने चूहा था, शर्म से उसका चहरा लाल हो रहा था.

    "मेरा ख्याल है अब तुम्हाइन जाना चाहिये, किसी को भी तुम्हारे अंधेर ना होने का शक पड़ सकता है". अभिनव ने अपने आप को संभालते हुए कहा

    "हाँ". मीना के गले से मुश्किल से आवाज़ निकली

    जैसे ही वो जाने के लिए खड़ी हुई उसका ब्रा जो उस ने खोल दया था और उसकी झोली मैं था, नीचे ज़मीन पे आ गिरा. शर्म से उसका सर अपने आप हे झुक गया, वो उसे उठाने के लिए झुकी हे थी के अभिनव ने उस से पहले हे उसे ज़मीन से उठा लिया

    "अगर इसे मैं अपने पास रख लूँ तो कोई ऐतराज़ तो नहीं?". अभिनव ने शरारती लहज़े मैं पूछा

    "तुम क्या करो गे इसका?". मीना ना मुस्कुराते हुए पूछा

    "कुछ तो मेरे पास भी होना चाहिये, जब तुम नहीं होती तो इसे हे देख कर गुजारा कर लूँ गा". अभिनव का लहजा अभी भी शरारती था

    "अगर तुम्हाइन पसंद है तो रख लो". मीना बस इतना हे कह सकी

    "पसंद क्यों नहीं होगा, इसे मैं से तुम्हारे खुशबू जो आती है". अभिनव ने ये कहते हुए उसके ब्रा को अपने नाक के करीब ले जा के एक लंबी साँस ली

    "त्म्हरे इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे, मुझे अब जाना चाहिये यहाँ से". मीना ने ये कहते हुए अपनी छादिर लपटी और तकरीबन भाग के उसके कमरे से निकल आई. अभिनव के क़हक़े ने उसका पीछा क्या था

    मीना अपने कमरे की तरफ तेज तेज चलती हुए जा रही थी, उसके चेहरे पे एक पूर-सकूँ से मुस्कुराहट थी. उसे लगा था के शायद अभिनव को मान'ना बहुत मुश्किल होगा. लेकिन वो तो बहुत आसानी से मान गया था, इतने सालों से जिस इंसान से वो मोहब्बत करती आए थी, आज उसकी बाहों मैं कुछ लम्हें गुजरना, उस ने जैसे प्यार से उसके जिस्म को चूहा था. ये सब तो एक ख्वाब की तरह हे था, वो जो चाहते थी वो सब हो रहा था. क्या किस्मत को उस पे रहम आ गया था, क्या वाक़ई उसका महबूब भी उसके प्यार मैं दीवाना हो गया था. वो जानती थी आज की रात उसे नींद नहीं आनी थी अपने महबूब की बाहों मैं गुजरे वो पल उसे सोने नहीं डैन गे, लेकिन उसे सोना था और अपनी आने वाली जिंदगी के हसीना सपने डैखहने थे जो अभिनव के साथ वो गुजरने वाले थी, लेकिन वो इसे बात से अंजान थी के सपनों की कीमत भी चुकानी पड़ती है और कभी कभी वो कीमत सपनों से भी ज्यादा महँगी होती है.
    आने वाले 3,4 दिन अभिनव और मीना के लिए बहुत मुश्किल थे, अभिनव इसे बात के इंतिज़ार मैं था के कब मीना चाबी का निशान लगा हुआ साबुन उसे देती है और मीना इसे मुश्किल मैं थी के जैसा उन्होंने सोचा था वैसा कुछ नहीं हो रहा था. मीयर्रा भाई जब चंदा को अपने कमरे मैं चोद कर जाती थी तो तब भी चाबी वो अपने साथ हे अंदर बाथरूम मैं ले जाती थी इसे लिए मीना को कोई मोक़ा नहीं मिल रहा था अपने प्लान को कामयाब करने का. दूसरी तरफ अभिनव रोज़ उस से पूछता था के वो कामयाब हुई या नहीं. अभिनव को भी इसे बात का एहसास हो गया था के जितना आसान..
     
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